जीवन मेरा हो,
पर मार्ग मेरे सतगुरु वाला हो।
ऐसा मार्ग…
जहाँ हर इंसान को प्रेम से देखा जाए,
जहाँ करुणा शब्द नहीं — स्वभाव बन जाए,
जहाँ निर्मलता मन की पहचान हो,
और दया हर व्यवहार में दिखाई दे।
मेरे सतगुरु का जीवन यही सिखाता है कि
किसी के प्रति नफ़रत, घृणा, ईर्ष्या, द्वेष या अहंकार रखे बिना भी
इस संसार में जिया जा सकता है।
बल्कि वही जीवन सच्चे अर्थों में प्रामाणिक बनजाता है।
मेरे सतगुरु के जीवन का एक दिन भी
हमारे पूरे जीवन के बराबर सीख दे जाता है।
उनकी वाणी, उनका व्यवहार, उनका धैर्य,
हर क्षण मनुष्य को उसकी असली पहचान याद दिलाता है।
उनके चरणों में बैठकर ऐसा अनुभव होता है
कि इंसान केवल सुनता नहीं… बदलने लगता है।
वहाँ यह सीख मिलती है कि
हर किसी से वैसे ही मिलो,
जैसे मेरे गुरुदेव मिलते हैं —
प्रेम से, विनम्रता से, अपनापन देकर।“प्रयास” बस इतना है —
जीवन मेरा रहे,
पर हर व्यवहार में मेरे सतगुरु की झलक दिखाई दे।

